Showing posts with label Positivity. Show all posts
Showing posts with label Positivity. Show all posts

Saturday, 26 March 2022

क्या ईश्वर हमारी परीक्षा लेता है ?




 ईश्वर कभी भी हमारी परीक्षा  नहीं लेता, परीक्षा लेना एक तरह से ये दर्शाता है की परीक्षक हम पर अविश्वास करता है, डाउट करता है और इसीलिए हमारी योग्यता जाचना चाहता है । 

ईश्वर केवल हमसे प्रेम करता है , अविश्वास नहीं। जिनको हम परीक्षा कहते हैं वह सिर्फ हमे मजबूत बनाने की प्रक्रिया होती है । 

मजबूती के शिखर पर पहुँचकर आपको अपने अंदर की उस अद्भुत शक्ति का पता  चलता है जो आपकी दुनिया को बदल कर रख देती है । साथ ही साथ ये आपको अपने आस पास के लोगो के जीवन मे बेहतरी लाने की शक्ति देती है । 

Friday, 24 September 2021

जब दुःख सहने के अलावा कोई रास्ता ना हो

 

जब जीवन में बहुत दर्द एक साथ आता है, और सहने के अलावा और कोई चारा नही होता तो हमारे सामने दो ही रास्ते होते हैं - (1)एक तो यह की आप उस दुःख में गहरे डूब जाएं और अवसाद या depression का शिकार हो जाएं, 
             (2) और दूसरा ये कि आप ये समझे कि ईश्वर आपको संकेत दे रहा है अपने अंदर की आतंरिक ऊर्जा और प्रेम को जगाने का। 



असीमित दुःख आपको असीमित प्रेम की ओर खींचने की शक्ति रखता है। वह आपको ईश्वर के करीब ले जाता है, जिसके पास जाने से हम सुख और दुःख दोनों से ही दूर हो जाते हैं। 

बस ज़रूरत यह है कि ऐसे समय में हम नकारात्मक ऊर्जा से दूर रहें एवं खुद को उन कार्यो में, उन activities में लगाये जो हमें उस समय को थोड़ा टल जाने में मदद करें, और इस काली रात्रि के बाद के उजाले में हम आगे का रास्ता देख सकें। 
ये activities, या कार्य कौनसे हैं जिनसे कि आप नकारात्मकता से बच सकें , अगली पोस्ट में। 

Monday, 20 September 2021

जब अच्छा करने पर भी दिल दुखे तो क्या करें



जब अच्छा करने पर भी दिल दुखे तो क्या करें 

 

When people dislike you even when you do good to them

What should you do when people hurt you

 

जीवन मे अक्सर ऐसा होता है कि हम अच्छा करते हैं पर बदले मे हमे बुराई मिलती है । कभी ऐसा होता है कि जिसके साथ अच्छा किया वो कुछ गलत शब्द हमारे लिए कहता है और कभी ऐसा होता है कि लोग काम होने के बाद भूल जाते हैं, और दोबारा काम पड़ने पर ही याद करते हैं । 

 














 म जब हम किसी के लिए अच्छा करें, भलाई करें, फिर भी आपको बदले मे बुराई सुन ने को मिले तो क्या करें। तारीफ के बदले कोई कमी निकाले तो क्या करें।

       हमारा स्वभाव है अच्छा करने का, दूसरे का स्वभाव है बुरा करने का । किसी का अच्छा तब ही करें जब ऐसा करने से खुद को अच्छा महसूस होता हो। वरना उस व्यक्ति की तरफ से neutral या तटस्थ हो जाएँ। इस से आपका दिल नहीं दुखेगा। 

      जब भी कभी ऐसा हो, तो ये जान लें की आपके emotions उस व्यक्ति के कंट्रोल मे हैं, आपके कंट्रोल मे नहीं। और वह जब चाहे आपको दुखी या खुश कर सकता है। ये स्तिथि  कोई खास अच्छी नहीं है। ये आपके मन की शांति को खराब कर सकती है। 

-    जब दूसरों को यह पता होता है तो कई बार वे आपको कंट्रोल करके आपका फायदा भी उठाते हैं । अगर ये लोग आपके अपने हैं तो दायित्व पूरे करें पर मन मे ना लें , ना ही किसी प्रकार की अच्छाई की उम्मीद करे । 


-   दूसरे
को अपनी आखो से देखने की आदत है, आपको अपनी। अगर आपका मन अच्छा है तो आपको अच्छा ही दिखेगा, और दूसरे को बुरा चाहे आप कितना भी अच्छा क्यू न कर ले  , क्यूकी ये उस व्यक्ति और आपके  स्वभाव पर निर्भर करता है । व्यक्ति अपने स्वभाव नहीं छोड़ते। 


-    कभी कभी ये बुरा बोलने वाले आपके अपने घर मे ही होते हैं। इस से दिल ज़्यादा दुखता है। बाहर कोई कुछ भी बोल दे वो आपको ज़्यादा अफफेक्ट नहीं करता। पर आपके अपने जब दिल दुखाते हैं तब ज़्यादा बुरा लगता है। जब ऐसी कंडिशन मे आप होते हैं तो यकीन मानिए ईश्वर चाहता है की आप तारीफ  के चार बोल की इच्छा से बाहर निकाल आगे कुछ करें और अपनी खुशी अपने भीतर ही ढूँढे । और ऐसी असीम शांति तो पा लें जिसको कोई डिस्टर्ब नहीं कर सकता । आपको कोई खुश या दुखी नहीं कर सकता । आपके जब इस स्तिथि मे आ जाते हैं तो सबसे साथ होकर भी और ना होकर भी आनंद मे रहने लगते हैं । 


o    अगर आपको ऐसा लगता है कि मुझे ही बुरे लोग क्यों मिलते हैं तो ये जान लीजिए कि आप अकेले नही हैं। अगर आपको विश्वास न हो तो किसी भी इंसान से पूछ लें कि क्या उसका दिल लोगो ने दुखाया है। क्या उसको अच्छे लोग कम और बुरे लोग ज़्यादा मिले हैं। सबका जवाब हाँ में ही आएगा। 

o    तो इसका मतलब ये दोष हम सबमे है। कही ना कही हम सब अच्छे और बुरे हैं किसी ना किसी के लिए। 


o    ईश्वर के अलावा कोई परफेक्ट नहीं है, सबमे कुछ ना कुछ दोष ज़रूर है। इस बात को हम जितना जल्दी एक्सेप्ट कर लें उतना ही अच्छा है। जब हम ऐसा कर लेंगे तो हम स्वीकार कर पाएंगे सबको उनके गुण दोष के साथ। 


o    वास्तव में मनुष्य हर जगह ईश्वर को ही ढूंढता है। उसकी चित्त वृत्ति जाने अनजाने ईश्वर की ओर ही होती है। शांति, उल्लास, प्रेम, ज्ञान, परफेक्शन , कभी ना छूटने वाला साथ, ये सब ईश्वर के ही गुण हैं। पर हम जब अपूर्ण में पूर्णता को ढूँढ़ते हैं तब दुखी होते हैं।